Monday, February 13, 2012

प्रेम दिवस यानि Valentine Day - 2012 - गीत

आज प्रेम दिवस यानि Valentine Day है.....इस अवसर पर मैं अपने पुराने दिनों को याद करता हुआ अपना एक पुराना गीतपोस्ट कर रहा हूँ......ये मेरे जीवन का सच्चा और भोगा हुआ गीत है

गीत रचना - वर्ष 1998
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तुमने प्यार किया ही कब था
तुम तो केवल बहक गयीं थीं

दो पग चलकर पीछे हटना
ये मुझको मंज़ूर नहीं था
अगर भरोसा करती मुझपर
तो फिर साहिल दूर नहीं था

आलिनगंबध होकर कुछ पल
तुम तो केवल महक गयीं थीं

मेरे भावों की सरिता को
तुमने राह दिखाई क्यों
साथ नहीं चलना था तो फिर
मुझमे अलख जगाई क्यों

तुम नव कोंपल थीं कलरव सुन
शायद कुछ पल चहक गयीं थीं

कवि दीपक गुप्ता
+91 9811153282
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Monday, February 6, 2012

मेरी एक नयी ग़ज़ल

न मन में मैल है मेरे न मेरी सोच छोटी है
बुरा दिल का नहीं हूँ मैं ज़रा सी अक्ल मोटी है

मेरा दिल इसलिए मिलता नहीं कुछ ख़ास लोगों से
ख़री मैं बात कहता हूँ जो उनको लगती खोटी है

वही शतरंज जीवन की वही फ़िर वक़्त से लड़ना
ख़ुदा के वास्ते इन्सान केवल एक गोटी है

गरीबी में भी मैं यारो हमेशा मस्त रहता हूँ
भले पीने को पानी है न खाने को ही रोटी है

ख़ुदा भी हौसला उसको कभी देता नहीं 'दीपक'
हमेश जो ये कहता है मेरी तक़दीर खोटी है

कवि दीपक गुप्ता
+91 9811153282
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Saturday, February 4, 2012

एक नयी ग़ज़ल

ख़ुदा से होड़ करने पर तुला है
बशर इस दौर का इक चुटकुला है

समझ आता नहीं किरदार उसका
कभी अक्खड़ कभी वो चुलबुला है

कभी भी जाईए फ़रियाद लेकर
फ़कीरों का हमेशा दर खुला है

जो सुख- दुःख को बराबर तोलती हो
हमारी ज़िन्दगी ऐसी तुला है

परिंदे आज कितने खुश हैं देखो
कई दिन बाद ये मौसम खुला है

कवि दीपक गुप्ता
+91 9811153282
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Saturday, January 28, 2012

सरस्वती पूजा - वसंत पंचमी के दिन मेरी प्रार्थना - 28 जनवरी 2012

मान रहे , सम्मान रहे औ मुझमे स्वाभिमान रहे
चले लेखनी मेरी निरंतर जब तक उर में जान रहे
यही कामना है मेरी कि सबको शिक्षा - ज्ञान मिले
नव पीढ़ी की प्रतिभाओं को भी उनकी पहचान मिले

ऐसा दे वरदान शारदे ऐसा दे वरदान
जो भी तुझमे ध्यान लगाये हो उसका कल्याण

हर लय में तेरा वंदन हो हर शब्द तेरा अभिनन्दन हो
रच दूं जो मैं भाव सुमन वो सुरभित करता चन्दन हो
आस भरी रंगीन तूलिका जीवन में नव रंग भरे
नित्य रवि आलोकित करता मन में नयी उमंग भरे

अधरों पर मुस्कान रहे औ मन में हो भगवान्
ऐसा दे वरदान शारदे ऐसा दे वरदान
जो भी तुझमे ध्यान लगाये हो उसका कल्याण

कवि दीपक गुप्ता
www.kavideepakgupta.com
+91 9811153282

Monday, December 19, 2011

मेरी एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ब का नूर चेहरे पर अलग मुस्कान होती है
फ़क़ीरों की , अदीबों की निराली शान होती है

बताया था हमें लोगों ने , हमने आज़माया भी
जो नीयत नेक हो तो राह भी आसान होती है

भला हम दूसरों से क्यों करें तुलना किसी की भी
हरेक इंसान की अपनी अलग पहचान होती है

करें हम कितनी भी कोशिश मगर वो टल नहीं सकती
कि, होनी होके रहती है बड़ी बलवान होती है

वो जो बेजान पत्थर हैं वही कल बोल उटठेंगे
तराशो और देखो पत्थरों में जान होती है

कवि दीपक गुप्ता
+91 9811153282
www.kavideepakgupta.com
New Delhi , India

Saturday, October 29, 2011

एक नया गीत जो मैंने इस दीवाली पर लिखा है , शायद आपको पसंद आये ....कृपया अपनी प्रतिक्रिया दीजियेगा


जो जैसा है उसको वैसा रहने दो

कौन कहाँ किससे क्या कहता कहने दो

जो जैसा चलना चाहे वो चला करे

मैं ये चाहूँ इश्वर सबका भला करे


कुछ होते हैं फुंक - फुंक कर जो जलते हैं

कुछ होते हैं जलभुन कर जो फुंकते हैं

घने अँधेरे कितनी भी साजिश कर लें

उजियारे के कदम कभी ना रुकते हैं


हमको जीवन भर दीपक सा जलना है

जिसको जैसा जलना है वो जला करे


स्वारथ में सब नदियों का दोहन करके

रिश्तों के सारे सागर ही रीते हैं

बाहर से तो खुश रहने का ढोंग किया

लेकिन भीतर से घुटघुट कर जीते हैं


सबकुछ पाकर भी बस रोते रहते हैं

काश कि कंजूसों को दौलत फला करे


हम चुप हैं तो ये मत समझो गूंगे हैं

पढ़ना आता हो तो पढ़ लो ख़ामोशी

हम ना बहके हैं और ना ही बहकेंगे

हमने खुद ही ओढ़ी है ये मदहोशी


अपने मन में एक फकीरा गाता है

दुनिया को खलता है तो खला करे


कवि दीपक गुप्ता

+91 9811153282

www.kavideepakgupta.com

New Delhi (NCR) Faridabad, India


Wednesday, June 8, 2011

ग़ज़ल - ख़त मिला महबूब का , मजमून गायब


ख़त मिला महबूब का , मजमून गायब
दाल , सब्जी में हो जैसे नून गायब

हो गए सैनिक रिहा बस शर्त ये थी
उँगलियाँ तो थीं मगर नाखून गायब

दोस्तों ने इस कदर मुझको उधेडा
भेड़ के तन से हो जैसे उन गायब

आदमी अब दूर है इंसानियत से
आँख से पानी जिगर से खून गायब

चांदनी पर शोध करने वाले इक दिन
देख लेना कर ही देंगे "मून" गायब

कवि दीपक गुप्ता
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